भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 278, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें३२ भारत में अंग्रेज़ी राज
मराठों ने बंगाल पर हमले शुरू किये। इन हमलों से अपनी रक्षा करने
के लिये अलीवर्दी ख़ाँ ने दिल्ली से मदद की प्रार्थना की, किन्तु दिल्ली
दरबार से उसे किसी तरह की सहायता न मिल सकी। मजबूर
होकर नवाब अलीवर्दी ख़ाँ ने दिल्ली को सालाना मालगुज़ारी भेजना
बंद कर दिया, किन्तु इस पर भी वह अपने तईं सम्राट् का एक
सेवक और उसकी प्रजा मानता रहा और सम्राट् के अधीन केवल
एक सूबेदार की हैसियत से शासन करता रहा।
इसमें संदेह नहीं कि बंगाल की तमाम रिआया अलीवर्दी ख़ाँ
और उसके पूर्वजों के शासन में अत्यंत सुखी
उस समय का और .खुशहाल थी। अंग्रेज़ इतिहास लेखक
बंगाल एस० सी० हिल उस समय के किसानों की हालत
के विषय में लिखता है :—
“मैं समझता हूँ सामाजिक इतिहास के हर विद्यार्थी को स्वीकार करना
होगा कि अठारवीं सदी के मध्य में बंगाल के किसानों की हालत उस समय
के फ़्रांस या जर्मनी के किसानों की हालत से बढ़कर थी ।”*
यह उस समय के ग्रामों की हालत थी। अब यदि उस समय
के शहरों की हालत पर नज़र डाली जाय तो बंगाल की राजधानी
मुर्शिदाबाद के विषय में स्वयं प्रसिद्ध अंग्रेज़ सेनापति क्लाइव
लिखता है :—
“मुर्शिदाबाद का शहर उतना ही लम्बा, चौड़ा, आबाद और धनवान है
जितना कि लंदन का शहर। अंतर इतना है कि लंदन के धनाढ्य से धनाढ्य
- Bengal in 1756-57, by S. C. Hill, vol. i. p. xxiii