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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 277

दूसरा अध्याय
सिराजुद्दौला
सन् १७०७ ई० में सम्राट् औरंगज़ेब की मृत्यु हुई। मुग़ल साम्राज्य
[हाशिया: नवाब अलीवर्दी] का बल और विस्तार उस समय अपनी परा-
[हाशिया: ख़ाँ] काष्ठा पर था, किन्तु साम्राज्य के नाश के बीज
बोए जा चुके थे। औरंगज़ेब के बाद ही दिल्ली के
शाही दरबार का दबदबा घटना शुरू हो गया। चारों ओर छोटी
छोटी बादशाहतें साम्राज्य से टूट टूट कर अलग होने लगीं और
अलग अलग सूबों के सूबेदार नाम मात्र को साम्राज्य के अधीन रहे,
किन्तु वास्तव में अपने अपने विशाल राज्यों के स्वच्छंद शासक
बन गए।
नवाब अलीवर्दी ख़ाँ मुग़ल सम्राट् के अधीन बंगाल, बिहार और
उड़ीसा तीन प्रांतों का सूबेदार था। मराठों की शक्ति बढ़ रही थी,