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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 269

भारत में यूरोपियन जातियों का प्रवेश २३
के राज में था। दिल्ली सम्राट का एक सूबेदार दक्खिन में रहता
था। करनाटक का नवाब और कई अन्य राजा व नवाब, इस
सूबेदार के मातहत थे। पुद्दुचरी के फ़्रांसीसी मुखिया डूमास ने
करनाटक के नवाब दोस्तअली खाँ को ख़ूब खुश कर रक्खा था।
यह समय १८ वीं सदी के शुरू का समय था, जब कि औरंगज़ेब
की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य का बल घटना शुरू हो गया था।
इस बीच मराठों ने करनाटक पर हमला किया। डूमास ने मौक़ा
पाकर नवाब को सहायता देने का वादा किया। नवाब से इजाज़त
लेकर उसने पुद्दुचरी में क़िलेबंदी कर ली और १२०० यूरोपियन
तथा ५००० हिन्दोस्तानियों की सेना उसमें जमा करली। यूरोप
निवासियों के हाथों में यह पहली हिन्दोस्तानी सेना थी। डूमास
की सहायता काम कर गई। मराठों का करनाटक विजय करने का
प्रयत्न निष्फल गया। करनाटक का नवाब और दिल्ली का सम्राट
दोनों डूमास से खुश हो गए। सम्राट ने प्रसन्न होकर डूमास को
'नवाब' की उपाधि प्रदान की और मुग़ल साम्राज्य के अधीन उसे
दो हज़ार सवारों का सेनापति नियुक कर दिया। पुद्दुचरी के
इलाक़े पर अब फ़्रांसीसियों का पूरा क़ब्ज़ा हो गया।
सन् १७४१ में डूमास की जगह दूप्ले फ़्रांसीसी कंपनी की ओर
से पुद्दुचरी का हाकिम नियुक्त हुआ। दूप्ले एक अत्यंत योग्य और
चतुर सेनापति था, उसके पूर्वाधिकारी डूमास को दिल्ली से नवाब
का ख़िताब मिल चुका था। दूप्ले ने खुद अपने तईं 'नवाब दूप्ले'
कहना शुरू कर दिया। दूप्ले पहला यूरोपनिवासी था जिसके मन