भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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२२ भारत में अंगरेज़ी राज
औरंगज़ेब के बाद मुग़ल साम्राज्य की निर्बलता का समय
आया। अंगरेज़ों को मौक़ा मिला, उनके अत्याचारों ने और अधिक
गम्भीर तथा भयंकर रूप धारण किया। इस बीच धीरे धीरे भारत
के पूर्वी तथा पश्चिमी तटों पर ईस्ट इण्डिया कम्पनी की अनेक
नई कोठियाँ बन गईं। अंगरेज़ी व्यापार भारत में बढ़ता गया।
कम्पनी के पत्तीदार और छोटे बड़े मुलाज़िम सभी भारत के धन
से मालामाल हो गए। औरंगज़ेब की मृत्यु के ठीक पचास साल
बाद बंगाल में अंगरेज़ी राज की नींव रक्खी गई, जिसकी कहानी
एक दूसरे स्थान पर बयान की जायगी।
अन्तिम यूरोपियन क़ौम, जो इस सिलसिले में भारत आई,
फ़्रांसीसी थी। फ्रांसीसी या फ्रेंच फ्रांस देश के
फ़्रांसीसियों का रहने वालों को कहते हैं। ईस्ट इण्डिया कंपनी
प्रवेश के मुक़ाबले की एक फ़्रांसीसी कंपनी ठीक उसी
उद्देश से सन् १६६४ ईसवी में क़ायम हुई। फ़्रांसीसियों ने सन्
१६६८ में सूरत, सन् १६६६ में मछलीपट्टन और सन् १६७४ में
पुद्दुचरी (पाण्डिचेरी) में अपनी कोठियाँ बनाईं।
फ़्रांसीसियों की नीति आरम्भ से यह थी कि वे भारतीय
शासकों की खुशामद करके जिस तरह हो उन्हें अपने पक्ष में रखने
की कोशिश करते थे। पुद्दुचरी का नगर उस समय कर्नाटक
Likely enough his native subjects around them were jealous and disposed
to be quarrelsome. Why should not Firanghees defend themselves as best
they might? Poor people! they had come a long way, and seemed to
work hard—he would not interfere. "—Torrens' Empire in Asia, pp. 4, 5.