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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 264

१८ भारत में अंगरेज़ी राज
भारतवासियों के साथ इनका व्यवहार हद दर्जे की ज़्यादती
और बेईमानी का था। सूरत की कोठी के अंगरेज़ों की बाबत एक
विद्वान् अंगरेज़ पादरी फ़िलिप एण्डरसन लिखता है :-
"ज्यों ज्यों इन साहसिक आगन्तुकों की तादाद बढ़ती गई, उनसे अंगरेज़
क़ौम की नेकनामी नहीं बढ़ी। इनमें से बहुत ज़्यादा लोग ज़बरदस्तियाँ और
बेईमानियाँ करते थे $\times$ $\times$ $\times$ हिन्दू और मुसलमान दोनों अंगरेज़ों को गाय
खाने वाले और आग पीने वाले नीच दरिन्दे समझते थे और कहते थे कि
ये लोग उन बड़े बड़े कुत्तों से भी ज़्यादा जंगली हैं जिन्हें ये अपने साथ लाते
हैं। ये शैतान की तरह लड़ते हैं और अपने बाप को भी दग़ा दे लेते हैं और
दूसरों से अपना काम निकालने या उनकी चीज़ ले लेने में गोलियों की
बौछार या भालों की मार और माल की गठरी या रुपयों की थैली चारों में से
किसी का भी उपयोग करने के लिये हरदम तय्यार रहते हैं।"*
अंगरेज़ों के इस व्यवहार को देख कर भारतवासियों का ख़याल
ईसाई धर्म के विषय में भी उन दिनों बहुत ख़राब हो गया था। वही
विद्वान आगे चल कर लिखता है :-
"किन्तु टेरी साहब का बयान है कि भारतवासी ईसाई धर्म को बहुत

  • "As the number of adventurers increased the reputation of the English
    was not improved. Too many committed deeds of violence and dishonesty.
    . . . Hindus and Musalmans considered the English a set of cow-eaters and
    fire-drinkers, vile brutes, fiercer than the mastiffs which they brought with
    them, who would fight like Eblis, cheat their own fathers, and exchange with
    the same readiness a broadside of shot and thrusts of boarding pikes, or a bale
    of goods and a bag of rupees."—The English in Western India, by Rev.
    Philip Anderson, p. 22.