भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४ भारत में अंगरेज़ी राज
की है। उस समय के इङ्गलिस्तान के बादशाह जेम्स अव्वल के राज
और भारत के मुग़ल साम्राज्य की—क्षेत्रफल, आबादी, धन, वैभव,
तिजारत, कला कौशल, दस्तकारी, खुशहाली, शासन-प्रबन्ध, विद्या,
बल—किसी बात में भी किसी प्रकार की तुलना नहीं की जा सकती।
जहाँगीर के दरबार में उस समय किसी को इस बात का गुमान
भी न हो सकता था कि दूरवर्ती पच्छिम की एक छोटी सी निर्बल,
असभ्य या अर्द्धसभ्य जाति का जो दूत उस समय दरबार में
दोज़ानू होकर ज़मीन चूम रहा था उसी के वंशज एक रोज़ मुग़ल
साम्राज्य के अङ्ग भङ्ग हो जाने पर हिन्दोस्तान के ऊपर शासन
करने लगेंगे। जहाँगीर ने हॉकिन्स की खूब ख़ातिर की। किन्तु
पुर्तगाली पहले से दरबार में मौजूद थे, उन्होंने जहाँगीर से अंगरेज़ों
की खूब बुराइयाँ कीं। सन् १६१२ ईसवी में अंगरेज़ों ने सूरत के
पास कुछ पुर्तगाली जहाज़ों पर हमला करके उन्हें गिरफ़्तार कर
लिया। उसी समय से सूरत में पुर्तगालियों का प्रभाव घटने और
अंगरेज़ों का प्रभाव बढ़ने लगा।
६ फ़रवरी सन् १६१३ को जहाँगीर ने एक शाही फ़रमान के
जहाँगीर और ज़रीये अंगरेज़ों को अपनी तिजारत के लिये सूरत
अंगरेज़ में एक कोठी बनाने की इजाज़त दे दी और यह
भी इजाज़त दे दी कि मुग़ल दरबार में इङ्गलिस्तान
का एक एलची रहा करे।
- इङ्गलिस्तान के बादशाह ने सर टॉमस रो को मुग़ल दरबार में
अपना पहला एलची नियुक्त करके भेजा। सर टॉमस रो सन् १६१५