भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 259, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंभारत में यूरोपियन जातियों का प्रवेश १३
और मलका के नाम अपनी दरख़्वास्त में लिख दिया था कि—"हमें
अपना व्यापार अपने ही जैसे आदमियों द्वारा चलाने की इजाज़त
होनी चाहिये, क्योंकि यदि लोगों को इस बात का संदेह भी हो
गया कि हम शरीफ़ आदमियों को अपने यहाँ नौकर रक्खेंगे, तो
मुमकिन है हमारे बहुत से साहसिक पत्तीदार अपनी पत्तियाँ वापस
ले लें *।” यही भारत के अंदर इस अंगरेज़ कम्पनी के ढाई सौ
साल के कारनामों और उसकी समस्त नीति की कुंजी है। इन ढाई
सौ साल के अंदर कम्पनी के मेम्बरों, मुलाज़िमों आदि में बिरले ही
ऐसे हुए होंगे, जिन्हें 'शरीफ़' कहा जा सके।
नक़्शे मिलने के तीस साल बाद यानी सन् १६०८ ईस्वी में
पहला अंगरेज़ी जहाज़ हिन्दोस्तान पहुँचा। इस
भारत में पहला जहाज़ का नाम 'हेक्टर' था। 'हेक्टर' प्राचीन
अंगरेज़ यूनान के एक वीर योद्धा का नाम था। अंगरेज़ी
में हेक्टर शब्द का अर्थ 'हेकड़ीबाज़' या 'झगड़ालू' है। यह
जहाज़ सूरत के बन्दरगाह में आकर लगा। सूरत उस समय
भारतीय व्यापार का एक विशेष केन्द्र था। जहाज़ का कप्तान
हॉकिन्स पहला अंगरेज़ था जिसने समुद्र के रास्ते आकर
भारत की भूमि पर क़दम रखा। इङ्गलिस्तान के बादशाह जेम्स
अव्वल की ओर से दिल्ली के मुग़ल सम्राट के नाम हॉकिन्स
अपने साथ एक पत्र लाया, जो उसने आगरे पहुँच कर सम्राट
जहाँगीर के सामने पेश किया। यह बात केवल तीन सौ साल पहले
- Ibid.