भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२ भारत में अंगरेज़ी राज
ब्रिस्टल ही के एक सौदागर ने इङ्गलिस्तान के बादशाह आठवें
हेनरी को भारत के मार्ग की खोज कराने की सलाह दी।
पचास साल से कुछ ऊपर तक इङ्गलिस्तान के बड़े बड़े नाविक
उत्तर-पच्छिम से होकर भारत पहुँचने के निष्फल प्रयत्न करते रहे।
सन् १५७८ में जब किइङ्गलिस्तान का एक मशहूर नाविक सर फ़्रैंसिस
ड्रेक भारत से लिसबन जाने वाले एक पुर्तगाली जहाज़ को पकड़ कर
लूट रहा था, उस लूट में उसे कुछ नक़शे मिले जिनसे अंगरेज़ों को
पहली बार भारत के उस समय के जल-मार्ग का कुछ पता चला।
सन् १६०० ई० में इङ्गलिस्तान की रानी एलिज़ेबेथ ने सुप्रसिद्ध
“ईस्ट इण्डिया कम्पनी” की रचना की। यह
ईस्ट इण्डिया कम्पनी उन अंगरेज़ व्यापारियों की एक मंडली
कम्पनी थी, जो हिन्दोस्तान के साथ तिजारत करने की
इच्छा रखते थे। यह बात याद रखने योग्य है कि जो फ़रमान रानी
एलिज़ेबेथ ने इस मौक़े पर जारी किया, उसमें इस कम्पनी को इस
तरह के साहसी लोगों की मंडली (Society of Adventurers)
कहा गया है जो लूट, सट्टे आदि के लिये निकलते हैं और जो अपने
धन कमाने के उपायों में सच झूठ, ईमानदारी बेईमानी अथवा
न्याय अन्याय का अधिक ख़याल नहीं रखते। कम्पनी के डाइरेक्टरों
ने शुरू ही में इस बात का फ़ैसला कर लिया था कि हम “किसी
ज़िम्मेदारी की जगह किसी शरीफ़ आदमी को नियुक्त न करेंगे*।”
- “Not to employ any gentleman in any place of charge.”—Bruce's Annals
of the Hon'ble East India Company, vol. i, p. 128.