भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभारत में यूरोपियन जातियों का प्रवेश ७
इनके उपयोग को मानबधर्म के विरुद्ध समझते थे और पुर्तगाल-
निवासी इन हथियारों के इस्तेमाल में होशियार थे। इस सबसे
बढ़कर भारतवासी राजनीति में अत्यन्त भोले थे। नतीजा यह हुआ
कि सौ सवा सौ साल के अंदर पुर्तगालियों ने भारतीय व्यापार
से इतना अधिक धन कमाया कि उसे देख अन्य यूरोपनिवासी दंग
रह गए और इसी समय के अंदर पुर्तगाली मङ्गलोर, कच्चिन, लङ्का,
दिव, गोआ, बम्बई के टापू और नेगापट्टन के मालिक बन बैठे।
पुर्तगालियों के उस समय के व्यापार की दो बातें ख़ास तौर
पुर्तगालियों का पर जानने योग्य हैं। एक यह कि इन लोगों के
व्यवहार कुछ जहाज़ भारत के पूर्वी और पच्छिमी तटों
के बराबर बराबर घूमते रहते थे और किसी
भी भारतीय जहाज़ को पार्स से निकलते हुए देखकर उसे पकड़
कर लूट लेते थे। अपने जहाज़ों में बैठकर ये लोग किनारे की
आबादियों पर भी धावा कर देते थे, उन्हें लूट लेते थे और कभी
कभी मौक़ा पाकर वहाँ के पुरुष स्त्रियों को ग़ुलाम बनाकर पकड़ ले
जाते थे। दूसरे ये लोग अफ़रीका और अन्य देशों से अपने जहाज़ों
में ग़ुलाम भर भर कर लाते थे और भारत के बाज़ारों में, विशेष
कर उन स्थानों में जो उनके अधीन थे, अत्यन्त सस्ते दामों पर
बेच डालते थे।
भारत के जिन हिस्सों पर पुर्तगालियों का क़ब्ज़ा हो गया था,
वहाँ की प्रजा के साथ इन लोगों का व्यवहार अत्यन्त अनुदार
था। ये लोग कट्टर ईसाई थे और जिस देश पर इनका राज होता