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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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६ भारत में अंगरेज़ी राज
सन् १५०० ई० में पुर्तगालियों ने अपने व्यापार के लिए काली-
कट में एक कोठी बनाई। तीन साल बाद उन्होंने सामूरी की इजाज़त
से अपनी कोठी की क़िलेबन्दी कर ली और एक फ़ौजी अफ़सर
अल्बुकर्क को उसका क़िलेदार नियुक्त किया। अल्बुकर्क ने किनारे
किनारे उत्तर की ओर बढ़कर सन् १५०६ में गोआ नगर पर क़बज़ा
कर लिया। भोले भारतवासी उस समय तक इन विदेशियों के
वास्तविक चरित्र या इनके इरादों से बिल्कुल अपरिचित थे। होते
होते सन् १५१० ईसवी में पुर्तगालियों का कालीकट के राजा के
साथ कुछ झगड़ा हो गया, जिसमें पुर्तगालियों ने कालीकट के
राजमहल को आग लगा दी और नगर को लूट लिया। केवल बारह
साल पहले इन परदेसियों पर अनुग्रह करने का भोले और उदार
सामूरी को यह फल मिला।
राज-शासन की दृष्टि से भारतवर्ष उस समय अनेक छोटी बड़ी
रियासतों में बँटा हुआ था, जो एक दूसरे के
उस समय का साथ बहुत कम संबन्ध रखती थीं। कोई एक
भारत प्रधान शक्ति इन रियासतों को वश में रखने या
देश को एक सूत्र में बाँधने वाली न थी। पुराने हिन्दू साम्राज्य
बहुत समय पहले टुकड़े टुकड़े हो चुके थे और दिल्ली का मुग़ल
साम्राज्य अभी तक क़ायम न हुआ था। मालूम होता है कि इस
बात का विच्चार तक कि भारत 'एक देश' है उस समय किसी के
दिल में मौजूद न था। इसके सिवा भारतबासी उस समय तोप,
बन्दूक़ आदि आग्नेय अस्त्रों का बनाना जानते हुए भी आमतौर पर