सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 232, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 232

१६८ पुस्तक प्रवेश
बाज़ी की शरण नहीं लेनी पड़ती और इतने ईमानदार हैं कि न
इन्हें अपने दरवाज़ों में ताले लगाने पड़ते हैं और न लेन देन में
इन्हें लिखा पढ़ी की ज़रूरत होती है। कभी भी किसी भारत-
वासी को झूठ बोलते हुए नहीं सुना गया।"*
उस समय के भारतवासियों के चरित्र की इस समय के भारतवासियों
के चरित्र से तुलना करना अत्यन्त दुखकर है। इस तुलना पर टीका करते हुए
और मिश्र यूनान इत्यादि की मिसालें देते हुए ई० ए० रॉस लिखता है—
"भारतवासियों के उच्चतर जीवन के ऊपर विदेशी शासन
का प्रभाव ऐसा ही है जैसा किसी चीज़ को पाला मार गया हो।"†
निस्सन्देह पिछले पौने दो सौ साल से यह प्राचीन देश वेग के साथ
मानसिक, नैतिक और भौतिक सर्वनाश की ओर बढ़ता चला जा रहा है।
हमारा कर्त्तव्य
अंगरेज़ी राज कब से
सब से अन्तिम, किन्तु सब से अधिक गम्भीर प्रश्न हमारे सामने यह
है कि इस घातक विपत्ति से निकलने का हमारे लिए अब क्या उपाय हो

  • "They are remarkably brave, superior in war to all Asiatics; they
    are remarkable for simplicity and integrity; so reasonable as never to have
    recourse to a law suit and so honest as neither to require locks to their
    doors nor writings to bind their agreement. No Indian was ever known to
    tell an untruth."—The Greek Historian Arrian, as quoted in Ibid, pp. 132, 133.
  • " . . . the alien dominion has a blighting effect upon the higher
    life of the people of India."—Ibid.