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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 226

१६२ पुस्तक प्रवेश
एडमण्ड बर्क ने इङ्गलिस्तान की पार्लिमेण्ट के सामने बारन हेस्टिंग्स
के मुक़दमें के सिलसिले में कहा था—"एक भी ऐसी सन्धि नहीं है जो
अंगरेज़ों ने भारतवर्ष में किसी के साथ की हो और जिसे उन्होंने बाद में
तोड़ा न हो।"
दोनों के चरित्र में अन्तर
अंगरेज़ों और भारतवासियों के सम्बन्ध की अनेक छोटी मोटी घटनाएँ
इस तरह की मिलती हैं जिनसे पता चलता है कि दोनों जातियों के चरित्र
में इस बात में कितना ज़बरदस्त अन्तर था। इस विषय की एक दो मिसालें
यहाँ पर बे मौके न होंगी। हैदरअली और अंगरेज़ों की लड़ाइयों में अनेक
ही बार ऐसा हुआ कि हैदरअली ने पराजित अङ्गरेज़ सैनिकों और सेना-
पतियों को उनसे यह वादा लेकर छोड़ दिया कि हम इसके बाद कम से
कम बारह महीने तक आपके ख़िलाफ़ कहीं न लड़ेंगे। किन्तु फिर चन्द
दिन के बाद ही वे ही अंगरेज़ सैनिक और सेनापति किसी दूसरी जगह के
संग्राम में हैदरअली के ख़िलाफ़ लड़ते हुए दिखाई दिए। इसके विपरीत
हैदरअली ने एक बार जब कि वह अंगरेज़ी इलाक़े में विजय पर विजय प्राप्त
करता हुआ बढ़ा चला जा रहा था, कम्पनी के अंगरेज़ दूत से यह वादा
किया कि मद्रास के फाटक पर पहुँचकर मैं आपकी ओर से सुलह की
बातचीत सुन लूँगा। विजयी हैदर मद्रास के फाटक तक पहुँच गया। वह
the exclusive right of breaking through engagements. If the violation of
existing covenants ever involved ipso facto a loss of territory, the British
Government in the East would not now possess a rood of land between the
Brahmaputra and the Indus. "—Sir John Kaye in the Calcutta Review, vol. i,
p. 219.