भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअंगरेज़ों का दावा १४१
भी थे । वास्तव में इस विषय में अंगरेज़ों और भारतवासियों के
चरित्र में बहुत बड़ा अन्तर है। इस देश में मराठे सब से अधिक चतुर
राजनीतिज्ञ माने जाते थे । मराठों ने कई बार बङ्गाल पर हमला किया।
फिर भी बङ्गाल के मुसलमान सूबेदार अलीवर्दी ख़ाँ ने कहा था कि मराठों
ने कभी भी अपनी सन्धियों का उल्लङ्घन नहीं किया । अङ्गरेज़ों और
भारतीय नरेशों के क़रीब सौ साल के सम्बन्ध में शायद एक भी मौक़ा ऐसा
नहीं हुआ जिसमें किसी भी भारतीय नरेश ने अंगरेज़ों के साथ अपनी
सन्धि का उल्लङ्घन किया हो । सच यह है कि अनेक भारतीय नरेशों की
मुसीबतों का ख़ास सबब यही हुआ कि उन्होंने ऐसे ऐसे मौक़ों पर कम्पनी
के साथ अपनी सन्धियों का ईमानदारी के साथ पालन किया, जब कि उन
सन्धियों का पालन उनके और उनके देश के लिए साफ़ अहितकर दिखाई
दे रहा था। हमारे इस कथन के सबूत में असंख्य मिसालें पाठकों को स्थान
स्थान पर इस पुस्तक में मिलेंगी। इसके विपरीत अंगरेज़ों के अपनी
सन्धियाँ पालन करने या न करने के विषय में प्रसिद्ध अंगरेज़ इतिहास
लेखक सर जॉन के जो इङ्गलिस्तान के इण्डिया ऑफ़िस के 'पोलिटिकल
और गुप्त विभाग' का सेक्रेटरी रह चुका था, लिखता है—
“मालूम होता है कि अंगरेज़ सरकार ने सन्धियों के तोड़ने
का ठेका ले रक्खा था । यदि मौजूदा अहदनामों के तोड़ने की
सज़ा में किसी से उसका इलाक़ा छीना जा सकता है, तो इस
समय ब्रह्मपुत्र से लेकर सिन्धु नदी तक एक चप्पा ज़मीन भी
भारत में अंगरेज़ों के पास नहीं बच सकती ।” ❀
- "It would seem as though the British Government claimed to itself