भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १० )
हमला—हैदर के साथ निज़ाम का विश्वासघात—हैदर की माँ—वनियम
बाड़ी और आम्बूर में हैदर की विजय—अंग्रेज़ों की हार पर हार—
मंगलोर में टीपू की विजय—हैदरअली मद्रास के फाटक पर—हैदर और
बादशाह तीसरे जार्ज में सन्धि—हैदर और नवाब अरकाट में सन्धि—
मद्रास क़िले के फाटक पर हैदर की विजय के उपलक्ष में एक सन्धि—
अंग्रेज़ों का सन्धि तोड़ना—हैदर और नाना में सन्धि—हैदर का कर्नाटक
विजय करना—पूरिमपाक की लड़ाई—अरकाट की विजय—हैदर की
उदारता—हैदर की लगातार जीत—अंग्रेज़ों का भय—हैदरअली की अचानक
मृत्यु—युद्ध का अन्त—हैदर का चरित्र—उसका पद—उसकी जलसेना—
उसकी धार्मिक उदारता—हैदरअली और शङ्कराचार्य—हैदरअली का न्याय
—उसकी वीरता—सादगी—प्रजापालकता—खुशहाली। पृष्ठ ३०८-३६३
दसवाँ अध्याय
सर जॉन मैकफ़रसन
करनाटक के नवाब मोहम्मदअली और अंगरेज़ों में सम्बन्ध—मोहम्मद अली
के साथ कम्पनी की ज़्यादती—मैक्फ़रसन के कृत्य और चरित्र। पृष्ठ ३६४-३६८
ग्यारहवाँ अध्याय
लॉर्ड कॉर्नवालिस
गवरनर जनरल के नए अधिकार—टीपू सुलतान से अंगरेज़ों को भय—
टीपू के साथ युद्ध की तय्यारी—उस पर हमला—अंगरेज़ों की लगातार हार—