भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६ )
की हत्या—विद्रोही राघोबा और अंगरेज़—पूना में दूसरे पेशवा की नियुक्ति
—पहले मराठा युद्ध की जड़—अंगरेज़ों की पहली हार—अंगरेज़ों और
गायकवाड़ में सन्धि—वारन हेस्टिंग्स की दोरुख़ी चालें—मराठों को सन्देह
—हेस्टिंग्स की युद्ध की तय्यारी—पुरन्धर की सन्धि—अंगरेज़ों की सन्धि
तोड़ने की कोशिशें—कलकत्ते से अंगरेज़ी सेना का कूच—बरार के राजा
को फोड़ने के प्रयत्न—बम्बई से कम्पनी की सेना—ताले गाँव की लड़ाई—
अंगरेज़ों की दोबारा हार और दूसरी सन्धि—दूसरी सन्धि का उल्लंघन—
महारानी अहल्याबाई—अंगरेज़ों का सींधिया से झूठा वादा—सींधिया
और राघोबा के साथ गुप्त सन्धि—सींधिया के साथ विश्वासघात—समस्त
भारतीय नरेशों को मिलाने की नाना की कोशिशें—दिल्ली सम्राट के नाम
नाना का पत्र—तीसरी बार अंगरेज़ों की हार—राना गोहद, मूदा जी
भोंसले और निज़ाम का अंगरेज़ों का साथ देना—हैदरअली के अंगरेज़ों पर
हमले—अंगरेज़ों की ओर से हैदर से सन्धि की कोशिशें—सालबाई में
मराठों से सन्धि—पहले मराठा युद्ध का अन्त । पृष्ठ २६४-३०७
नवाँ अध्याय
हैदरअली
हैदरअली का जन्म—मैसूर की सेना में उसका भरती होना—हैदर
का दैव नियुक्त होना—सम्राट की ओर से सीरा का सूबेदार—शासन प्रबन्ध
और सुधार—अंगरेज़ों के साथ हैदर की पहली लड़ाई—हैदर की विजय—
उदारता—अंगरेज़ों के व्यवहार के साथ तुलना—टीपू का मद्रास पर