भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११ )
निज़ाम और मराठों का अंगरेज़ों को मदद देना—टीपू की सेना में विश्वास
घातक—श्रीरङ्गपट्टन पर अंगरेज़ों की चढ़ाई—मीडोज़ की हार—श्रीरङ्गपट्टन
की सन्धि—टीपू की प्रतिज्ञा—कार्नवालिस और दिल्ली सम्राट—कार्नवालिस
और नवाब अवध—कार्नवालिस और निज़ाम—भारत की ग्राम पंचायतें—
उनका नाश—नई अंगरेज़ी अदालतें—वकालत की नई प्रथा—इस्तमरारी
बन्दोबस्त—उस समय की देश की शोचनीय अवस्था । पृष्ठ ३६६-३९७
बारवाँ अध्याय
सर जॉन शोर
माधोजी सींधिया के नाश की तदबीरें—मराठा मण्डल की अव्यवस्था—
माधोजी सींधिया की हत्या—माधोजी की हत्या से अंगरेज़ों को लाभ—
पेशवा माधोराव नारायण की मृत्यु—अन्तिम पेशवा बाजीराव—सर जॉन
शोर और निज़ाम—सर जॉन शोर और नवाब करनाटक—रुहेलखण्ड—
सर जॉन शोर और अवध—अवध की मसनद का नीलाम—भारत के ख़र्च
पर अन्य देशों की विजय । पृष्ठ ३९८-४२४
तेरवाँ अध्याय
अंगरेज़ों की साम्राज्य पिपासा
मार्किस वेल्सली—यूरोप में आज़ादी की लहर—मैज़िनी के विचार—
अंगरेज़ों और फ़्रान्सीसियों के चरित्र में अन्तर—आयरलैण्ड की स्वाधीनता।