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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मुग़लों का समय १८३

स्नान कराया । यही हालत महाराजा रणजीत सिंह, होळकर, सींधिया, हैदर
अली और टीपू सुलतान के दरबारों की थी । प्रसिद्ध मराठा नीतिज्ञ नाना
फड़नवीस हैदरअली को अपना दाहिना हाथ कहा करता था और दोनों में
गहरी मित्रता थी। हमने इस पुस्तक में आगे चलकर दिखलाया है कि
हैदरअली की सारी नीति ही इस विषय में ठीक सम्राट् अकबर की नीति
की नक़ल थी। जगद्गुरु शङ्कराचार्य और टीपू सुलतान में एक दूसरे के लिए
गहरा प्रेम था । अवध के मुसलमान नवाबों के अधीन अधिकांश बड़े बड़े
तालुक़ेदार और मुख्य मुख्य मन्त्री तक हिन्दू होते थे, और लखनऊ दरबार
उदारता, एकता और प्रेम में रंगा रहता था। इसी तरह की और भी
मिसालें उस समय के इतिहास से दी जा सकती हैं। इसमें कुछ भी सन्देह
नहीं कि यदि भारत को मौक़ा मिलता तो वह शीघ्र एक औरङ्गज़ेब की
ग़लती के नतीजों से पनप कर अपना पहले का परस्पर विश्वास और पहले
का गौरव प्राप्त कर लेता ।
किन्तु भारत के दुर्भाग्य से ठीक उस समय जब कि औरङ्गज़ेब की
ग़लती के नतीजे अभी ताज़े थे और दिल्ली की केन्द्रीय सत्ता एकबार निर्बल
हो चुकी थी, एक ऐसी तीसरी शक्ति ने भारत के राजनैतिक मञ्च पर प्रवेश
किया जिसे भारत की उस ग़लती से पैदा हुए परस्पर के अविश्वास और
उनके बुरे नतीजों को स्थाई कर देने में ही अपना सब से बड़ा लाभ दिखाई
दिया और जिसका हित हर तरह भारतवासियों के हित के विरुद्ध था, और
जिसने भारत की उस, समय की अस्तव्यस्त हालत से पूरा पूरा फ़ायदा
उठाया ।