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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 210

१७६ पुस्तक प्रवेश
चेष्टा की। अकबर ने एक संयुक्त भारतीय राष्ट्र को अपनी आँखों के सामने
साक्षात करने का प्रयत्न किया। वास्तव में उसने एक नए भारत की रचना
करना चाहा। अकबर के स्वप्न सर्वथा पूरे न हो सके, किन्तु "उदारता और
खोज की जिस महान प्रवृत्ति" को उसने जन्म दिया वह अभी तक क़ायम
है और इसमें सन्देह नहीं कि जिस भारतीय राष्ट्रीयता को इस समय भारत
में जन्म देने का प्रयत्न किया जा रहा है उसका सब से पहला प्रवर्त्तक और
प्रचारक सम्राट अकबर ही था।
फ़्रेडरिक आगस्टस लिखता है—
"बहैसियत एक सेनापति के अकबर महान था, बहैसियत
राजनीतिज्ञ के वह नए समाज का निर्माणकर्ता था और सच्चे
मानवधर्म के एक क्रियात्मक व्याख्याता की हैसियत से आज तक
कोई उससे बढ़कर नहीं हुआ।" *
उस समय की हिन्दू मुसलिम संकीर्णता
सम्राट अकबर के बाद उसके दोनों उत्तराधिकारियों, जहाँगीर और
शाहजहाँ, ने एक दूसरे के बाद इसी नीति का अनुसरण किया और इसी
राष्ट्रीय प्रगति को बड़ी सुन्दरता के साथ जारी रखा। प्रगति और उसका
बल बढ़ता गया, यहाँ तक कि जैसा हम ऊपर लिख चुके हैं, शाहजहाँ का
समय भारतीय इतिहास में सबसे अधिक समृद्ध समय और अनेक अर्थों में
भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग था। किन्तु एकता, समता, उदारता और

  • "Akbar was great as a general, as a statesman creative and down to
    the present day he is unsurpassed as a practical exponent of genuine
    humanity."—The Emperor Akbar. etc., by Frederick Augustus. p. 296.