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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 209

मुग़लों का समय १७५
अकबर के सैकड़ों साल पहले से भारत में चल रही थीं और जो अकबर के
बाद तक भी अपना काम करती रहीं। धार्मिक विषय में अकबर ने कबीर के
ज्वलन्त उपदेशों से शिक्षा और प्रोत्साहन लिया। सम्राट हर्ष अकबर से
कई सौ साल पहले प्रयाग में शिव, बुद्ध, और सूर्य तीनों के मन्दिरों में
जाकर बारी बारी पूजा किया करता था। बंगाल में सम्राट हुसेनशाह द्वारा
'सत्यपीर' की पूजा का प्रचार जिसे हज़ारों हिन्दू और मुसलमान एक समान
मानते थे, अकबर के धार्मिक विचारों का एक प्रारम्भिक रूप था। फिर
भी अकबर का व्यक्तित्व और उसका लक्ष्य दोनों निराले और अत्यन्त
महान थे।
धार्मिक क्षेत्र में अपने 'अल्लाह उपनिषद्' और 'दीने इलाही' द्वारा
उसने एक सरल सार्वजनिक धर्म की नींव रखने की कोशिश की। सामाजिक
जीवन में उसने हज़ारों साल की उस प्रथा को, जिसके अनुसार हर विजेता
अपने युद्ध के क़ैदियों को गुलाम बना लिया करता था, सन् १५७३ में
क़ानूनन् बन्द कर दिया। बलात् वैधव्य, बालविवाह, बहुविवाह, धर्म के नाम
पर पशुबलि और सतो को प्रथा को उसने यथाशक्ति बन्द करने का प्रयत्न
किया। किन्तु उसने अपने किसी सुधार को भी तलवार के ज़ोर से चलाने
की चेष्ट नहीं की। .फ्रेडरिक आगस्टस लिखता है कि अकबर प्रति दिन
ग़रीबों में जितना भोजन वस्त्र इत्यादि तक़सीम किया करता था और
अपनी तीर्थ यात्राओं में जितना दान दिया करता था उसमें साम्राज्य की
आय का एक ख़ासा हिस्सा ख़र्च हो जाता था। स्त्री जाति की स्वतन्त्रता
का वह सच्चा पक्षपाती था। उसके हिन्दू मुसलिम विवाहों ने हिन्दू
मुसलिम सम्मिश्रण को और भी अधिक पक्की नींव पर क़ायम करने की