भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८ )
क्लाइव का इलाहाबाद आना—शुजाउद्दौला के साथ नई सन्धि—कम्पनी
को दीवानी के अधिकार—नजमुद्दौला की हत्या—भयंकर लूट और दो
अमली—खुले डाके—नमक पर महसूल—क्लाइव का व्यक्तिगत चरित्र—दो
अमली द्वारा बंगाल का नाश—दरिद्रता, दुष्काल और महामारी—खून के
आंसू । पृष्ठ २१७-२३७
सातवाँ अध्याय
वारन हेस्टिंग्स
दो अमली का अन्त—निरपराध रईसों का संहार—महाराजा नन्द
कुमार को फाँसी—बनारस की लूट और बरबादी—अवध की बेगमों पर
अत्याचार—भारत से हेस्टिंग्स की कमाई—कम्पनी के कर्मचारियों द्वारा
देशव्यापी लूट—गोरखपुर के किसानों और ज़मीदारों पर जुल्म—लगान
का बढ़ाया जाना—वारन हेस्टिंग्स पर मुक़दमा—क्षमा और इनाम ।
पृष्ठ २३८-२६३
आठवाँ अध्याय
पहला मराठा युद्ध
मराठा साम्राज्य की पराकाष्ठा—मराठा मण्डल—मराठा साम्राज्य की
अवनति—दक्खिन में कम्पनी की नीति—साष्टी और बसईं पर अंगरेज़ों के
दांत—मराठों, हैदर और निज़ाम में फूट डालने के प्रयत्न—नाना फड़नवीस
की दूरदर्शिता—अंगरेज़ दूत मास्टिन की करतूतें—पेशवा नारायन राव