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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 203

मुग़लों का समय १७१
का अपनी ओर से बङ्गला में अनुवाद कराया, और दूसरों को
इस तरह के कामों में मदद दी × × × जब कि बङ्गाल के बलवान
मुसलमान बादशाहों ने देश की भाषा को अपने दरबारों में यह
उच्च स्थान प्रदान किया तो कुदरती तौर पर हिन्दू राजाओं ने
उनका अनुसरण किया × × × इस तरह हिन्दू राजाओं के
दरबारों में बङ्गाली कवियों की नियुक्ति का रिवाज मुसलमान
बादशाहों की देखा देखी शुरू हुआ ।”*
बङ्गाल के मुसलमान बादशाहों के समान दक्खिन के बहमनी बाद-
शाहों ने भी वहाँ के साहित्य और कलाकौशल को खूब उन्नति दी।
आदिलशाही बादशाहों के दफ़्तरों में मराठी भाषा का उपयोग किया जाता
था और मराठों को माल और सेना विभाग के उच्च पदों पर नियुक्त किया
जाता था। क़ुतुबशाह दक्खिनी ख़ुद मराठी भाषा का सुन्दर कवि था और
साहित्य का बड़ा प्रेमी था। मराठी भाषा में हिन्दी और फ़ारसी दोनों
भाषाओं के शब्दों ने खूब प्रवेश किया।
हिन्दी, उर्दू, बङ्गला और मराठी के अलावा और उन्हीं के समान
पञ्जाबी और सिन्धी भाषाओं और उनके साहित्य ने भी मुसलमानों के
समय में भारत में अपूर्व उन्नति की। वास्तव में वह समय प्राचीन संस्कृत
के स्थान पर देशी भाषाओं के उत्थान का समय था। हिन्दुओं और
मुसलमानों का जीवन इस विषय में इतना गुथा हुआ था कि मिश्रबन्धुओं
ने अपनी पुस्तक में अनेक मुसलमान हिन्दी कवियों की और दिल्ली के

  • History of Bengali Language and Literature, by Didesh Chandra
    Sen, pp. 13, 14.