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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 202

१७० पुस्तक प्रवेश
हिन्दू राजा स्वाधीन बने रहते तो बङ्गला भाषा को राजाओं के
दरबारों तक पहुंचने का मुश्किल से ही मौक़ा मिल सकता था ।”*
बङ्गाल के मुसलमान शासकों ने विद्वान पण्डितों को नियुक्त करके,
रामायण और महाभारत का संस्कृत से बङ्गला में अनुवाद कराया । बङ्गाल
के मुसलमान शासक नसीरशाह ने चौदवीं सदी के शुरू में महाभारत का
बङ्गला में अनुवाद कराया । मैथिल कवि विद्यापति ने इस विषय में नसीर-
शाह और सुलतान गयासुद्दीन की ख़ूब प्रशंसा की है । राजा कंस के
उत्तराधिकारी ने इसलाम मत स्वीकार किया । कंस के दरबार में मुसलमानों
का प्रभाव बहुत अधिक था । रामायण के अनुवादक कृत्तिवास को उस
दरबार से पूरी सहायता मिलती थी । सम्राट हुसेनशाह ने मलधर वसु द्वारा
भागवत का बङ्गला में अनुवाद कराया और इसके इनाम में मलधर वसु को
गुनराज ख़ाँ का ख़िताब दिया । हुसेनशाह के सेनापति परङ्गल ख़ाँ ने
महाभारत का एक दूसरा बङ्गला अनुवाद कवीन्द्र परमेश्वर से कराया ।
परङ्गल ख़ाँ के बेटे चट्टग्राम के शासक छोटे ख़ाँ ने श्रीकरण नंदी से महाभारत
के अश्वमेध पर्व का अनुवाद कराया । एक मुसलमान अलाउल ने मलिक
मोहम्मद जायसी की हिन्दी पुस्तक पद्मावत का बङ्गला में अनुवाद किया ।
अलाउल ने कुछ फ़ारसी किताबों का भी बङ्गला में अनुवाद किया ।
दिनेशचन्द्र सेन लिखता है—
“इस तरह की मिसालें बेहद मिलती हैं जिनमें कि
मुसलमान सम्राटों और सरदारों ने संस्कृत और फ़ारसी के ग्रन्थों

  • Dinesh Chandra Sen History of Bengali Language and Literature,
    p. 10.