भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 199, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंभर फैला हुआ था और “आशा अन्तरीप ( अफ़रीका ) से लेकर चीन तक
हर स्त्री और पुरुष सिर से पाँव तक कपड़े पहनता है और ये सब कपड़े
भारतीय करघों के बने हुए होते थे।” अरब के सौदागर मिश्र में और
यूरोप में भारत के बने हुए कपड़े ले जाकर बेचते थे। लङ्का, बरमा, मलाका,
चीन, जापान, फ़िलिप्पाइन और मेक्सिको में उन दिनों भारत के कपड़ों
की बेहद खपत थी। इस पुस्तक के अन्दर ‘भारतीय उद्योग धंधों का नाश’
शीर्षक अध्याय में हमने अङ्गरेज़ों के आने से पहले की भारतीय उद्योग धंधों
की अवस्था को बयान किया है।
उस समय के इतिहास और यूरोपियन और अन्य यात्रियों के वृत्तान्तों
से यह भी पता चलता है कि मुग़ल समय का भारत न केवल उस समय
के यूरोपियन देशों से ही कहीं अधिक घना बसा हुआ था, बल्कि इस समय
के भारत से भी उस समय के भारत की आबादी कम से कम ख़ास ख़ास
प्रान्तों में कहीं अधिक घनी थी। कलकत्ता, बम्बई और कराची का उस
समय निशान न था। किन्तु आगरा, कन्नौज, विजयनगर, गोलकुण्डा,