भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 200, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें१६८ पुस्तक प्रवेश
की आबादी उस समय "इतनी अधिक थी की जिस पर विश्वास करना
कठिन है।" विजयनगर के हिन्दू राजाओं के पास बीस लाख फ़ौज तैयार
रहती थी। इतनी ही घनी आबादी दखन, गुजरात, पञ्जाब और बाक़ी
उत्तर भारत की बताई जाती है। आगरे शहर से लिखा है कि किसी भी
समय दो लाख सशस्त्र योधा जमा किए जा सकते थे । बङ्गाल की राजधानी
गौड़ के मकानों की संख्या बारह लाख थी, जिसका अर्थ यह है कि उस
समय के गौड़ की आबादी इस समय के लन्दन की आबादी से बहुत कम
न थी । सूरत से लाहौर तक, लाहौर से आगरे तक और आगरे से गौड़ तक
जिन घने बसे हुए ग्रामों और नगरों से होकर यूरोपियन यात्रियों को जाना
पड़ता था उन्हें देख कर वे चकित रह जाते थे । निस्सन्देह आबादी और
ख़ुशहाली दोनों के लिहाज़ से मुग़ल समय का भारत, केवल एक चीन को
छोड़ कर, संसार के अन्य समस्त देशों से कहीं अधिक बढ़ा चढ़ा था ।
देशी भाषाओं की उन्नति
मुग़लों और उन दूसरे मुसलमानों के ऊपर भी जो बाहर से आकर
भारत में बसे भारतीय जीवन, भारतीय रहन सहन, और भारतीय विचारों
की छाप लगे बग़ैर न रह सकी । यहाँ तक कि भारत के मुसलमान दूसरे
देशों के मुसलमानों से अलग बिल्कुल भारतीय मुसलमान बन गए । भारत
वासियों से मुग़लों ने पान खाना सीखा । हिन्दोस्तानी भाषा को जिसे वे
पहले ज़बानेहिन्दवी कहते थे, उन्होंने अपनी भाषा बनाया । बाबर और
उसके साथी आरम्भ में ईरानी ज़बान बोलते थे । थोड़े ही दिनों में उन्होंने
अपने घरों में, दफ़्तरों में और दरबारों में हिन्दोस्तानी बोलनी शुरू की,