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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मुग़लों का समय १६१
देश में हज़ारों कैथलिक, हज़ारों एङ्गलिकन, हज़ारों लूथरेन, हज़ारों प्युरिटेन,
हज़ारों प्रेसबिटेरियन, हज़ारों लेबेटर, हज़ारों एनेबेप्टिस्ट, और हज़ारों
कवेनेण्टर ज़िन्दा जला दिए गए, तलवार के घाट उतारे गए, या यातनाएँ
दे देकर मार डाले गए, और ये सब के सब ईसाई थे, उतने ही कट्टर ईसाई
जितने कि उन पर अत्याचार करने वाले उनके दूसरे देशवासी थे ।
भारत और यूरोप की तुलना
उस समय के भारत और यूरोप की तुलना करते हुए अंग्रेज़ इतिहास
लेखक टॉरेन्स लिखता है—
"दिल्ली के शुरू के सम्राटों के दिनों में, सत्रहवीं सदी के मध्य
तक, सब धर्मों के लोगों के साथ पूरी उदारता का व्यवहार किया
जाता था । ठीक उसी समय यूरोपनिवासी धर्म के नाम पर
अत्याचारों द्वारा अपने महाद्वीप को एक विशाल श्मशान भूमि
बनाने की ज़ोरदार कोशिशों में लगे हुए थे, अपने अपने धर्म की रक्षा
के लिए लोग यूरोप के विविध देशों से भाग भागकर अमरीका
में जा जाकर बस रहे थे । क्या आज उन्हीं लोगों के वंशज,
उनकी क़ब्रें बनाने वाले, भारत पर दोष लगाने का साहस कर
सकते हैं ? क्या वे बेशर्मी के साथ इस बात का दम भर कर
इतिहास को कलङ्कित कर सकते हैं कि उस समय उनकी सभ्यता
भारत की सभ्यता से अधिक सच्ची थी ? यदि उन्हीं के लिखे
इतिहास पर विश्वास करके उन्हीं की गवाही ली जाय, और जो
कट्टर ईसाई उस तमाम समय में धर्म के नाम पर फाँसियाँ खड़ी
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