भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १२६
"बङ्गाल के शासकों का मज़हब इसलाम है, किन्तु हर
मुसलमान पीछे वहाँ सौ से ऊपर हिन्दू हैं और तमाम सरकारी
नौकरियाँ और ओहदे बिना किसी भेद भाव के दोनों मज़हब के
लोगों को दिए जाते हैं।"*
डॉक्टर बेनीप्रसाद ने अपनी पुस्तक जहाँगीर के इतिहास में लिखा है
कि भारतीय मुग़ल सम्राटों के दरबारों में हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों
के मुख्य मुख्य त्योहार एक समान उत्साह और वैभव के साथ मनाए जाते
थे। दशहरे के दिन सम्राट के हाथी और घोड़े सज धज कर जुलूस में निकाले
जाते थे। रक्षाबन्धन के दिन ब्राह्मण लोग और हिन्दू सामन्त सरदार
सम्राट की कलाई में आकर राखी बाँधते थे, दीपावली की रात को महल में
रोशनी होती थी और जुआ तक खिलता था। शिवरात्रि को महलों के
अन्दर ख़ास रौनक़ दिखाई देती थी। ठीक इसी तरह मुसलमानों की ईद
और शबबरात भी उतने ही उत्साह के साथ मनाई जाती थी।* हर सम्राट
की सालगिरह साल में दो बार मनाई जाती थी, एक मुसलमान चाँद की
तारीख़ों के अनुसार और दूसरे हिन्दू तिथियों के अनुसार।
- There are above one hundred different sects . . . but they never
have any hot disputes about their doctrine or way of worship. Every one
is free to serve and worship God in their own way, and persecutions for
religion's sake are not known among them."
Further, "The religion of Bengal is established, is Mohammadan, yet
for one Mommadan there are above one hundred pagans and the public
offices and posts are filled promiscuously with men of both persuasions."--
Ibid, pp. 321, 415. - History of Jehangir, by Beniprasad, M. A., D. Sc., Ph. D., p. 100.