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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 190

१५८ पुस्तक प्रवेश
र, जहाँगीर, शाहजहाँ और उनके अधिकांश उत्तराधिकारियों के समय
में हिन्दू और मुसलमानों के साथ राज की ओर से एक समान व्यवहार
किया जाता था, दोनों धर्मों को एक समान आदर की दृष्टि से देखा जाता
था और किसी के साथ किसी तरह का भी पक्षपात न किया जाता था।
अंगरेज़ एलची सर टॉमस रो ने सन् १६१६ ईसवी में सम्राट जहाँगीर के
शासन काल में उस समय की हालत को देखते हुए लिखा था—
"तैमूरलङ्ग की सन्तान अपने साथ मोहम्मद का मज़हब
भारत में लाई, किन्तु उन्होंने अपनी विजय के बल किसी को
ज़बरदस्ती उस मज़हब में शामिल नहीं किया, और धर्म के मामले
में सबको आज़ाद छोड़ दिया।"*
औरंगज़ेब और उसके उत्तराधिकारियों के समय की (१६८८-१७२३)
बंगाल की हालत को बयान करते हुए एक दूसरा अंगरेज़ कप्तान अलेक्ज़ेण्डर
हैमिल्टन लिखता है—
"यहाँ पर एक सौ से ऊपर मत मतान्तरों के लोग हैं,
किन्तु वे अपने उसूलों या उपासना विधियों के विषय में कभी
नहीं लड़ते झगड़ते। हर शख़्स को आज़ादी है कि अपने तरीक़े
के अनुसार ईश्वर की सेवा और पूजा करे। मज़हब के नाम पर
दूसरे को किसी तरह की यातनाएँ देने का यहाँ कोई नाम भी
नहीं जानता x x x

  • "Tamerlain's offspring brought in the knowledge of Mohammad,
    but imposed it on none by the law of conquest, leaving consciences at
    liberty."—A General Collection of the Best and Most Interesting Voyages etc.,
    edited by John Pinkerton, London 1811, vol viii. p. 46.