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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 189

मुग़लों का समय १५७
पर नियुक्त किया जाता था। इतिहास लेखक फ़्रेडरिक आगस्टस इस बात
की गवाही देता है कि भारतीय मुग़ल साम्राज्य के “अधिकांश मुलाज़िम
और कर्मचारी ईमानदार और योग्य होते थे ।”*
मुक़दमों का फ़ैसला करने में देश के प्राचीन रस्मोरिवाज और धर्म-
शास्त्रों का पूरा ख़्याल रखा जाता था। सम्राट अकबर ने अनेक योग्य
ब्राह्मणों को न्यायाधीश के अधिकार प्रदान किए और आज्ञा दे दी कि
न्यायालयों में मनुस्मृति और अन्य हिन्दू धर्मशास्त्रों की आज्ञाओं का
पालन किया जाय। हर सम्राट सप्ताह में कम से कम एक दिन (प्रायः मङ्गल
या बुध का दिन) ख़ास ख़ास मुक़दमों और अपीलों को सुनने में व्यय
करता था। प्रजा के हर छोटे से छोटे मनुष्य को अपनी शिकायत लेकर
सम्राट तक जाने का अधिकार होता था। सम्राट जहाँगीर ने, जो अपने
इन्साफ़ के लिए मशहूर था, आगरे में अपने क़िले की दीवार के ऊपर से
एक सोने की ज़ञ्जीर लटका रक्खी थी जो ज़मीन तक लटकती थी। किसी
भी छोटे से छोटे फ़रियादी को उस ज़ञ्जीर को खींचने और अपनी अर्ज़दाश्त
उसमें बाँध देने का अधिकार होता था और तुरन्त उसे सम्राट के सामने
लाकर पेश कर दिया जाता था।
धार्मिक उदारता
धार्मिक उदारता के विषय में अकेले औरङ्गज़ेब को छोड़ कर भारतीय
मुग़ल सम्राटों का समय वास्तव में आदर्श समय था। बाबर, हुमायूँ,

  • "... the mass of the employees were both scrupulous and
    capable." — The Emperor Akbar, A Contribution Towards the History of
    India in the 16th Century, by Frederick Augustus, Count of Noer, translated
    by Annette S. Beveridge, 1890, p. 293.