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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 18

( ६ )
राम पर हमला—मीर जाफ़र से धन की वसूली—राजा रामनारायन से
समझौता—दिल्ली के शहज़ादे अलीगौहर की बिहार यात्रा—क्लाइव को
इनाम में जागीर—भारत में अंगरेज़ी राज क़ायम करने की क्लाइव की
योजना—मीरजाफ़र के पुत्र मीरन की दूरदर्शिता—सम्राट शाहआलम—
सम्राट के ख़िलाफ़ अंगरेज़ों की बग़ावत—शाहआलम की अनिश्चितता—
मीरन की हत्या—बंगाल की दर्दनाक हालत—कम्पनी की व्यापार सम्बन्धी
ज़्यादती—बंगाल में दूसरी बग़ावत की योजना—मीरजाफ़र से नई मांगे—
मीर क़ासिम के साथ गुप्त सन्धि—मीरजाफ़र का मसनद से हटाया जाना—
मीरजाफ़र पर इलज़ाम—कम्पनी को लाभ—कम्पनी की टकसाल ।
पृष्ठ १०६-१४६
चौथा अध्याय
मीर क़ासिम
बंगाल की हालत—कम्पनी के खोटे सिक्के—कम्पनी के अत्याचार—
महसूल की माफ़ी और उसका दुरुपयोग—व्यापार सम्बन्धी अत्याचार—
तिजारत के बहाने लूट—मीर क़ासिम की शिकायतें—नन्दकुमार का
देश प्रेम—मुग़लसाम्राज्य की निर्बलता—पानीपत की तीसरी लड़ाई
और भारत की स्वाधीनता—शाहआलम की बिहार पर चढ़ाई—राजा
रामनारायन से अंगरेज़ों का विश्वासघात—मीर क़ासिम का चरित्र और
शासन प्रबन्ध—मीर क़ासिम के सुधार—मीर क़ासिम के ख़िलाफ़
अंगरेज़ों की साज़िश—मीर क़ासिम पर झूठे इलज़ाम—अंगरेज़ों की लूट