भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १४७
मुग़लों की प्रजा पाळकता
किसानों को और रैय्यत को मुग़ल सम्राटों के समय में ख़ास सहायता
दी जाती थी और उनकी हर तरह रक्षा की जाती थी। जिस समय कोई
नया सूबेदार नियुक्त किया जाता था तो उसे और बातों के साथ साथ यह
आदेश दिया जाता था—
“रय्यत को इस बात के लिए प्रोत्साहन देना कि वे खेती
को उन्नति दें और अपने पूरे दिल से खेती बाड़ी को बढ़ाएँ। कोई
चीज़ उनसे ज़बरदस्ती न छीनना। याद रखना कि रय्यत
ही राज की आमदनी का एक मात्र स्थाई ज़रिया है। × × ×
“× × × इस बात का ख़याल रखना कि बलवान
निर्बलों पर अत्याचार न करें।”*
इसी तरह जब किसी प्रान्त के लिए नया सूबेदार नियुक्त होता था तो
सम्राट का वज़ीर, जिसे दीवाने आला कहते थे, उसे जो हिदायतें करता
था, उनमें से एक यह होती थी—
“ख़याल रखना कि बलवान निर्बलों पर अत्याचार न करें।
तमाम अत्याचारियों को दबा कर रखना।”†
- “Encourage the ryots to extend the cultivation and carry on
agriculture with all their hearts. Do not screw anything out of them.
Remember that the ryots are permanent that is the only permanent source
of income to the State.
“ . . . . . See that the strong may not oppress the weak.”—Ibid,
p. 85, 86.
† Ibid, p. 81.