भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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युद्ध विद्या, सैनिक व्यवस्था और क़िलेबन्दी के कामों ने भी जो उन्नति
मुग़लों के समय में की उतनी पहले कभी न की थी। बन्दूक़ों और तोपों
का रिवाज तमाम भारत में अधिकतर मग़लों ही के समय से फैला।
विशेष कर उत्तर भारत के रहन सहन और वेश भूषा में मुसलमानों
का साफ़ प्रभाव दिखाई देता है। हिन्दी, बङ्गला और मराठी भाषाओं में
इस समय तक असंख्य फ़ारसी, अरबी और तुरकी शब्द भरे हुए हैं। उत्तर
भारत में यदि किसी हलवाई की दूकान पर मिठाइयों के नाम गिने जायँ
तो उनमें बालूशाही, गुलाब जामुन, बरफ़ी, हलवा, कलाकन्द, खुरमा
इत्यादि अधिकांश नाम मुसलमानी हैं और इनमें से अधिकांश मिठाइयाँ
मुग़ल समय की ईजाद हैं। यहाँ तक कि हिन्दुओं के विवाह जैसे संस्कार
में भी सेहरा, और जामा जैसी चीज़ों का अभी तक उपयोग किया जाता है।
भारत की प्राचीन ग्राम पञ्चायतों और उनके अधिकारों में मुग़लों ने
किसी तरह का भी हस्तक्षेप नहीं किया। जदुनाथ सरकार लिखता है—
“उन्होंने बुद्धिमत्ता के साथ ग्राम शासन की पुरानी पद्धति
को और लगान वसूल करने के पुराने हिन्दुओं के तरीक़े को
ज्यों का त्यों जारी रक्खा, यहाँ तक कि लगान के मोहकमें
में अधिकतर केवल हिन्दू ही नौकर रक्खे जाते थे, नतीजा यह
हुआ कि राजधानी के अन्दर राजकुल के बदल जाने से हमारे
करोड़ों ग्रामवासियों के जीवन पर किसी तरह का अहितकर
प्रभाव न पड़ता था।”*
• Ibid, p. 139.