भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुग़लों का समय १४२
प्रोफेसर जदुनाथ सरकार का कहना है कि भारतवासियों को दूसरा लाभ
[जो मुसलमानों से पहुँचा वह इस देश के अन्दर ऐतिहासिक साहित्य का
प्रारम्भ था।
दूसरे देशों से सम्बन्ध
बौद्धमत के बाद से बाहर के देशों के साथ भारत का सम्बन्ध भी कम
होता जा रहा था । तिजारत गिरती जा रही थी । मुग़लों के शासन काल
में भारत का सम्बन्ध बाहर के अन्य देशों के साथ फिर से क़ायम हुआ ।
मुग़ल साम्राज्य के क़रीब क़रीब आख़िर तक अफ़ग़ानिस्तान दिल्ली के
सम्राट् के अधीन था, और अफ़ग़ानिस्तान के ज़रिए बुख़ारा, समरकन्द,
बलख़, खुरासान, ख़्वारज़िम और ईरान से हज़ारों यात्री और व्यापारी
भारत आते जाते थे । सम्राट् जहांगीर के दिनों में तिजारती माल से लदे
हुए चौदह हज़ार ऊँट हर साल केवल बोलन दर्रे से होकर भारत आते
जाते थे । इसी तरह पच्छिम में ठट्ठा, भड़ोच, सूरत, चाल, राजापुर, गोश्रा
और कारवार, और पूरब में मछलीपट्टन और दूसरे बन्दरगाहों से हज़ारों
जहाज़ हर साल अरब, ईरान, टरकी, मिश्र, अफ़्रीका, लङ्का, सुमात्रा, जावा,
स्याम और चीन आते जाते रहते थे । जदुनाथ सरकार इसे भारत के ऊपर
मुग़ल साम्राज्य का तीसरा उपकार बताता है ।
धार्मिक और सामाजिक एकता
चौथा उपकार प्रोफेसर सरकार की राय में भारत की उन धार्मिक
और सामाजिक लहरों का और अधिक ज़ोरों के साथ फैलना था, जिनका
हम ऊपर विस्तार के साथ ज़िक्र कर चुके हैं । पाँचवाँ शिल्पकला और
चित्रकारी की अपूर्व उन्नति और उसका विस्तार ।
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