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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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मुग़लों का समय | १४९

ख़ाँ और उसके साथ के दूसरे मुग़लों ने पराजित ईरानियों और अरबों से
इसलाम मत की दीक्षा ली ।
भारत पर मुग़लों का सब से पहला हमला सन् १३९८ ईसवी में तैमूर
का हमला था । महमूद तुग़लक उस समय दिल्ली के तख़्त पर था । किन्तु
सिवाय चन्द रोज़ की लूट खसोट और संहार के जिसमें हिन्दू और मुसलमानों
का कोई फ़र्क़ नहीं किया गया और कोई असर तैमूर के हमले का भारत
पर न रह सका और न तैमूर १५ दिन से ज़्यादा दिल्ली में ठहर सका ।
मुग़लों का दूसरा हमला इस देश के ऊपर सन् १५२६ ईसवी में बाबर
का हमला था । उस समय तक मुग़ल अपनी जन्मभूमि मङ्गोलिया से कहीं
अधिक सभ्य देश ईरान में बरसों रह चुकने के सबब से चङ्गेज़ और तैमूर के
मुक़ाबले में कहीं अधिक सभ्य और सभ्यताप्रेमी बन चुके थे । पानीपत के
मैदान में बाबर ने इब्राहीम लोधी को शिकस्त दी और भारत में मुग़ल
साम्राज्य की नींव रक्खी ।
पानीपत की विजय के बाद ही बाबर ने भारत को अपना घर बना
लिया । हुमायूँ को छोड़कर उसके बाक़ी वंशज भारत ही में पैदा हुए ।
भारत में एक प्रधान शक्ति की ज़रूरत
सम्राट हर्षवर्धन के बाद से यानी ईसा की सातवीं सदी के मध्य से
सोलवीं सदी के शुरू तक क़रीब ९०० साल तक भारत के अन्दर कोई भी
प्रधान राजनैतिक शक्ति ऐसी उत्पन्न होने न पाई थी जो समस्त भारत को
एक शासन के सूत्र में बाँध सकती । ९०० साल के अन्दर भारत अनेक
छोटी बड़ी एक दूसरे की प्रतिस्पर्धी रियासतों का युद्धक्षेत्र बना हुआ था ।
वह समय भारत के इतिहास में राजनैतिक निर्बलता, अनैक्य और अव्यवस्था