भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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आया । मुग़ल साम्राज्य के दिनों में ही भारत के अन्दर मुसलमानों की
हुकूमत, उनकी सभ्यता और उनका प्रभाव अपनी पराकाष्ठा को पहुँचा ।
किन्तु मुग़लों के शासन और भारत के ऊपर मुग़ल साम्राज्य के उपकारों या
अपकारों को बयान करने से पहले हम मुग़लों द्वारा संसार के अन्य देशों
की विजय पर भी एक नज़र डालना चाहते हैं ।
ईसा की तेरवीं सदी के शुरू में चङ्गेज़ ख़ाँ ने पूर्वी एशिया से निकल
कर उत्तरी चीन, तातार और शेष अधिकांश एशिया को विजय कर लिया
था । सन् १२२७ ईसवी में चङ्गेज़ ख़ाँ की मृत्यु हुई । इसके ६८ साल के
अन्दर चङ्गेज़ ख़ाँ के उत्तराधिकारियों ने भारत को छोड़ कर बाक़ी क़रीब
क़रीब तमाम एशिया को और यूरोप के एक बहुत बड़े हिस्से को मुग़ल
साम्राज्य में शामिल कर लिया । यूरोप पर उनका हमला सन् १२३८
ईसवी में हुआ । यूरोपियन इतिहास लेखक कहते हैं कि ईसा की आठवीं
सदी से जब कि अरबों ने यूरोप पर हमला किया था उस समय से सन्
१२३८ तक कोई और इतनी भयंकर आपत्ति यूरोप पर न आई थी । कुछ
साल के अन्दर ही तमाम रूस, पोलैण्ड, बलकान, हङ्गेरी यहाँ तक कि
उत्तर में बाल्टिक समुद्र और पच्छिम में जरमनी तक, आधे से ज़्यांदा
यूरोप मुग़लों के अधीन हो गया । रूस के ऊपर दो सौ साल तक मुग़लों
की हुकूमत रही । शुरू के मुग़ल बौद्ध थे । स्वयं चङ्गेज़ ख़ाँ बौद्धमत का
अनुयायी था और साथ ही अपने देश मङ्गोलिया के कुछ प्राचीन धार्मिक
विचारों अश्वपूजा इत्यादि को भी मानता था । इन्हीं मुग़लों ने अधिकांश
एशिया और यूरोप को विजय किया । बौद्ध मुग़लों ने मुसलिम ईरान और
मुसलिम इराक़ को फ़तह किया और उसके बाद चङ्गेज़ ख़ाँ के पौत्र हुलाकू