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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 170

१३८ पुस्तक प्रवेश
सोलवीं सदी के क़रीब 'समाधियाँ' या 'छतरियाँ' बनाना हिन्दुओं में
पहली बार शुरू हुआ और निस्सन्देह यह रिवाज हिन्दुओं में मुसलमानों
से पड़ा। इमारतों में महराब का उपयोग, डाट की गोल छत और आज
कल की उद्यान कला ये तीनों भारत ने मुसलमानों ही से सीखीं। वर्तमान
भारत के सुन्दर से सुन्दर बाग़ मुग़ल सम्राटों के समय के बने हुए हैं, जिनमें
जहांगीर के समय का बना हुआ काश्मीर का शालामार बाग़ अभी तक
संसार का सब से सुन्दर बाग़ स्वीकार किया जाता है।
चित्रकला
इसी तरह चित्रकला में भी दो अलग अलग आदर्शों के मेल से
मुग़ल सम्राटों के अधीन भारत ने एक अधिक उच्च और अधिक सुन्दर
चित्रकला को जन्म दिया। हुमायूँ, अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ
के महलों में सैकड़ों हिन्दू चित्रकार केवल अपनी कला को तरक़्क़ी
देने के लिए बड़ी बड़ी तनख़्वाहें पाते थे। शीराज़, तबरेज़ यहाँ तक
कि चीन के बड़े बड़े चित्रकार भी वहाँ पर मौजूद रहते थे और
निस्सन्देह ये सब एक दूसरे की सहायता से अपनी अपनी कला को उन्नति
देते थे। उस समय की फ़ारसी पुस्तकों और दस्तावेज़ों में जयपुर, ग्वालियर,
गुजरात, काश्मीर इत्यादि के रहने वाले मुग़ल दरबार के अनेक हिन्दू और
मुसलमान चित्रकारों के नाम मिलते हैं, जिनमें से कुछ के हाथ के खिंचे हुए
सुन्दर चित्र अभी तक चित्रकला विशारदों को चकित करते रहते हैं। दिल्ली
और आगरे से लेकर जयपुर, जम्मू, चम्बा, काँगड़ा, लाहौर, अमृतसर और
दक्खिन में तंजोर तक उस समय एक सुन्दर भारतीय चित्रकला फैलती
और उन्नति करती हुई दिखाई देती थी। दिल्ली और आगरे में जिन आदर्शों