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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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भारतीय कला और मुसलमान १३७

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और दिल्ली इत्यादि की पुरानी मसजिदों, और तीसरी ओर मुग़ल समय के
आगरे और दिल्ली के शाही महलों या भारतीय निर्माणकला के सब से
अधिक सुन्दर नमूने, आगरे के ताज की ओर दृष्टि डाल लेना काफ़ी है।
निस्सन्देह आगरे का ताज संसार की सब से उत्कृष्ट और सब से अधिक
सुन्दर इमारतों में गिना जाता है, भारतीय निर्माणकला के मस्तक पर वह
झूमर का काम देता है, देश की इस पतित अवस्था में भी प्रत्येक भारतवासी
के सच्चे अभिमान और गौरव का पात्र है, और शिल्प के मैदान में इसलाम
से पूर्व के भारतीय आदर्शों और बाद के मुसलिम आदर्शों, दोनों के
प्रेमालिंगन का सबसे सुन्दर नमूना है।
शिल्पकला के पण्डित हमें बताते हैं कि ईसा की तेरहवीं सदी से पहले
की भारत की हिन्दू और मुसलमान इमारतें दो साफ़ अलग अलग आदर्शों
के अनुसार बनी हुई दिखाई देती हैं, किन्तु उसके बाद की हिन्दू इमारतों
पर मुसलिम छाप और मुसलिम इमारतों पर हिन्दू छाप भी उतनी ही
साफ़ दिखाई देती हैं और दोनों के सौन्दर्य को बढ़ाती हुई नज़र आती है।
यही वजह है कि भारत की मुसलिम शिल्पकला, मिश्र की मुसलिम शिल्प-
कला, शाम की मुसलिम शिल्पकला, ईरान की मुसलिम शिल्पकला और
टर्की की मुसलिम शिल्पकला, इन सब में बहुत बड़ा अन्तर है।
दिल्ली और आगरे के अलावा राजपूताना और काशमीर इत्यादि में
भी इस मिश्रित कला आदर्श के काफ़ी नमूने अभी तक मौजूद हैं। सोलवीं
सदी के बने हुए वृन्दावन के कुछ वैष्णव मन्दिर, सोनागढ़ के कुछ जैन मन्दिर,
विजयनगर की अनेक इमारतें और सत्रवीं सदी का बना हुआ मदुरा का
तिरूमलाई नायक का प्रसिद्ध महल भी इसी मिश्रित कला आदर्श के नमूने हैं।