भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 161, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंमानव धर्म १३१
रहीम को एक समझो, कर्मकाण्ड और जातिभेद के बन्धनों को
तोड़ दो और ईश्वर में विश्वास और मनुष्य मात्र के साथ प्रेम
को सब मिलकर अपना एक समान धर्म बनाओ ।" ✤
नामदेव
महाराष्ट्र का पहला सन्त, जिसने लोगों को जातिभेद, कर्मकाण्ड
और धार्मिक सङ्कीर्णता के बन्धन से हटा कर स्वतन्त्रता, प्रेम और भक्ति
का उपदेश दिया, नामदेव था। रनाडे लिखता है कि नामदेव और दूसरे
सन्तों के उपदेशों का नतीजा यह हुआ कि—मराठी भाषा के साहित्य की
उन्नति हुई, जातिभेद ढीला हुआ, स्त्रियों का पद ऊँचा हुआ, उदारता और
दयालुता फैली, इसलाम के साथ हिन्दू मत का एक दरजे तक मेल हो
गया, कर्मकाण्ड, तीर्थयात्रा इत्यादि का महत्व घटा, प्रेम का महत्व बढ़ा,
अनेक देवी देवताओं की पूजा कम हुई, और विचारों और क्रियाओं दोनों
के क्षेत्रों में राष्ट्र की ताक़त बढ़ी। †
खेचर
नामदेव के गुरु खेचर ने नामदेव को जो उपदेश दिया उससे ज़ाहिर है
कि खेचर मूर्तिपूजा का कट्टर विरोधी था। उसने कहा कि—
“पत्थर का देवता कभी नहीं बोलता, तो फिर वह हमारे
इस जीवन के दुःखों को कैसे दूर कर सकता है ? पत्थर की मूर्ति
को लोग ईश्वर समझ बैठते हैं, किन्तु सच्चा ईश्वर बिलकुल दूसरा
ही है। यदि पत्थर का देवता हमारी इच्छाएँ पूरी कर सकता तो
- Ranade : Rise of the Maratha Power, pp. 50, 51.
† Ibid.