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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 160

१३० पुस्तक प्रवेश
“खोंकड़ ( ? ) पच्छिम की तरफ को मुँह किए ईश्वर से
प्रार्थना कर रहा है ।
“कोई अल्लाह की पूजा करता है, कोई अली की और कोई
महमूद साईं की ।
“मियाँ किसी जीव की हत्या नहीं करता और न मुरदार
खाता है ।
“धीमी आँच के ऊपर वह अपना भोजन पका रहा है ।
“जात पाँत के भेद अब धीरे धीरे टूट जायेंगे, क्योंकि देखो
हिन्दू कुटुम्ब के अन्दर एक मुसलमान है ।
✕ ✕ ✕
“ऐ खुदा-! मैं जानता हूँ तू और सब से बड़ा है । मैं बहुत
चाहता हूँ कि तेरे मुँह से कुरान सुनूँ ।”
महाराष्ट्र सन्त
उत्तर भारत की तरह महाराष्ट्र के हिन्दू महात्माओं ने भी हिन्दू और
मुसलमान धर्मों को मिलाने का प्रयत्न किया । प्रसिद्ध महाराष्ट्र विद्वान
महादेव गोविन्द रनाडे लिखता है—
“इसलाम का कठोर एक ईश्वरवाद कबीर, नानक इत्यादि
सन्तों के चित्तों में साफ़ घर कर गया था । हिन्दू त्रिमूर्ति दत्तात्रेय
के उपासक अक्सर अपने देवता को मुसलमान फ़क़ीर के से कपड़े
पहनाते थे । यही प्रभाव महाराष्ट्र जनता के चित्तों पर और भी
ज़ोरों के साथ काम कर रहा था । ब्राह्मण और अब्राह्मण दोनों
तरह के प्रचारक वहाँ लोगों को उपदेश दे रहे थे कि राम और