भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमानव धर्म १२६
संस्थापक कर्ताबाबा एक मुसलमान फ़क़ीर की दुआ से पैदा हुआ था और
उस फ़क़ीर ने ही उसे पाला था । कर्ताबाबा के बाईस मुख्य शिष्य 'बाईस
फ़क़ीर' के नाम से मशहूर हुए । इनमें से एक रामदुलाल की बाबत, जो
कर्ताबाबा का उत्तराधिकारी हुआ, कहा जाता है कि उसके अन्दर उसी
मुसलमान फ़क़ीर की रूह आ गई थी । इस सम्प्रदाय के आचार्यों में से
अनेक हिन्दू हुए और अनेक मुसलमान । ये लोग केवल एक ईश्वर को
मानते थे, गुरु को ईश्वर का अवतार मानते थे, दिन में पाँच बार गुरुमन्त्र
का जाप करते थे, मांस मदिरा से परहेज़ करते थे, शुक्रवार को पवित्र दिन
मानते थे और उसे धर्म चर्चा में व्यतीत करते थे, जात पाँत, ऊँचनीच,
हिन्दू, मुसलमान, ईसाई का उनमें कोई भेद न था, साल में कम से कम
एक दो बार सम्प्रदाय के सब लोग एक साथ मिल कर भोजन करते थे,
इत्यादि ।
बौद्ध ग्रन्थों में मुसलमान
बङ्गाल में जिन दिनों बौद्धों के ऊपर शैवों के अत्याचार जारी थे,
मालूम होता है, एक दरजे तक बौद्धों को मुसलमानों से सहायता, दिलासा
और आश्रय मिला । बङ्गाल के उस समय के बौद्ध ग्रन्थों, 'शून्य पुराण',
'धर्म पूजा पद्धति', 'धर्म गजन', 'बाद जननी', इत्यादि में और बौद्ध गीतों
में ब्राह्मणों के प्रति कोष और बदले का भाव और मुसलमानों, मुसलिम
विचारों और मुसलमान ग्रन्थों के प्रति प्रेम भरा हुआ है । उस समय के
इन बौद्ध काव्यों से कुछ विचित्र बातों का पता चलता है । मसलन यह कि
उस समय बङ्गाल जाने वाले बहुत से मुसलमान मांस से परहेज़ करते थे,
एक जगह लिखा है—
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