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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 158, कुल 727 में से

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पृष्ठ 158

१२८ पुस्तक प्रवेश
पर ब्राह्मणों का ठेका हो गया था, मानो वह कोई बाज़ारी
चीज़ हो ।"*
इसलाम के सरल धार्मिक सिद्धान्तों और मनुष्य मात्र की समता के
आदर्श ने उस समय के बङ्गाली समाज में तहलका मचा दिया । चैतन्य ने
इस स्थिति पर गम्भीरता के साथ विचार किया । वह घर बार छोड़ कर
देशाटन करने लगा । अनेक साधुओं और फ़क़ीरों से उसकी भेंट हुई ।
चैतन्य के जीवन चरित्र का रचयिता कृष्णदास लिखता है कि बृन्दावन में
एक मुसलमान पीर के साथ चैतन्य की भेंट हुई और पीर ने अपनी धार्मिक
पुस्तक के आधार पर चैतन्य को एक ख़ुदा की पूजा का उपदेश दिया । जदु
भट्टाचार्य लिखता है—"चैतन्य के जीवन की अनेक घटनाएँ ऐसी हैं जिनसे
पूरी तरह साबित है कि वह मुसलमानों से बड़ा प्रेम करता था ।"† इसमें
सन्देह नहीं कि मुसलमानों के विचारों का चैतन्य के उपदेशों पर बहुत
बड़ा असर पड़ा ।
चैतन्य ने गुरु की सेवा और भक्ति का उपदेश दिया । जाति भेद का
उसने कड़ा विरोध किया । ब्राह्मणों के तमाम कर्मकाण्ड को उसने त्याज्य
बताया । चैतन्य के शिष्यों में हिन्दू और मुसलमान, उच्च जाति के लोग
और नीच जाति के लोग, सब शामिल थे । उसके मुख्य शिष्यों में से तीन
रूप, सनातन और हरिदास, मुसलमान थे । अपने तमाम शिष्यों में वह
हरिदास से सब से अधिक प्रेम रखता था ।
कर्ताबाबा
चैतन्य की सम्प्रदाय की एक शाखा का नाम कर्ताभज था । उसका

  • History of Bengali Language and Literature, by Dinesh Chandra Sen.
    † Jadu Bhattacharya: Hindoo Castes and Sects. p. 464.