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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 136

१०८ पुस्तक प्रवेश
में उपयोग किया है, किन्तु उसने साफ़ लिखा है कि उसका राम दशरथ का
पुत्र राम नहीं है । वह लिखता है—
सिरजनहार न ब्याही सीता, जल पषाण नहिं बन्धा ।
यानी—सिरजनहार ने सीता से विवाह नहीं किया था और न उसने
समुद्र के ऊपर पत्थरों का पुल बाँधा ।
कबीर ने अनेक स्थान पर दसों अवतारों का खण्डन किया है । वह
ईश्वर के विषय में कहता है —
दशरथ कुल अवतरि नहिं आया, नहिं लङ्का के राव सताया ।
नहीं देवकी गर्भहि आया, नहीं यशोदा गोद खेलाया ।
पृथ्वी रवन धवन नहिं करिया, पैठि पताल नाहिं बलि छलिया ।
नहिं बलिराज सो माँडल रारी, नहिं हरनाकुश वधल पछारी ।
बगह रूप धरणि नहिं धरिया, छत्री मारि निछत्री नहिं करिया ।
नहिं गोवर्धन कर गहि धरिया, नहिं ग्वालन सँग बन बन फिरिया ।
गण्डकि शालिग्राम नहिं कूला, मच्छ कच्छ होय नहिं जल डोला ।
द्वारावती शरीर नहिं छाँड़ा, ले जगन्नाथ पिण्ड नहिं गाड़ा ।
जात पाँत और छुयाछूत के विषय में कबीर ने कहा है—
गुप्त प्रकट है एकै दूधा, का को कहिए ब्राह्मण शूद्रा ।
झूठे गर्भ भूलो मति कोई, हिन्दू तुरुक झूठ कुल दोई ।
और के छिये लेत हो छींछा, तुमसों कहहु कौन है नीचा ।
कबीर ने आवागमन के मोटे रूप का जिस तरह आम हिन्दू
मानते हैं खण्डन किया है; इस विषय में उसके विचार काफ़ी गूढ़ और
गहरे हैं ।