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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 123

राजपूत नरेशों ने अलग अलग ख़ासी वीरता के साथ मुक़ाबला किया।
किन्तु उनमें किसी तरह का ऐक्य या नीतिज्ञता बाक़ी न रह गई थी। इसके
बाद सौ साल के अन्दर मैसूर तक अधिकांश भारत पर मुसलमानों की
हुकूमत क़ायम हो गई।

विदेशी और स्वदेशी

ज़ाहिरा देखने में भारतीय जीवन को एक बार गहरा धक्का पहुँचा।
किन्तु जिन मुसलमानों ने बाहर से आकर भारत पर हमला किया वे फिर
भारत में बस गए और भारत ही के होकर रह गए। भारत पर मुसलमानों
की हुकूमत क़ायम होने से पहले जो लाखों भारतवासी इस्लाम धर्म
स्वीकार कर चुके थे, उनके सबब और उस आदर के सबब जो, जैसा हम
दिखा चुके हैं, अधिकांश भारतवासियों के चित्त में इस्लाम की ओर पैदा
हो चुका था, इन बाहर से आने वाले मुसलमानों को भारत के अन्दर
बसने और मिल जुल जाने में काफ़ी सुगमता हुई। एक नस्ल के अन्दर ही
वे पूरी तरह भारतवासी बन गए। उन्हें देशवासियों के हित में अपना हित
और उनके सुख में अपना सुख दिखाई देने लगा। भारत को उस अन्धकार
मय युग में एक प्रधान राजनैतिक शक्ति की आवश्यकता थी। जिन मुसल-
मानों ने विदेशी रूप में इस देश पर हमला किया था, उन्होंने स्वदेशी और
भारतीय बन कर भारत की इस आवश्यकता को बड़ी सुन्दरता के साथ
पूरा किया।
हम कभी किसी भी व्यक्ति या क़ौम के दूसरे व्यक्ति या क़ौम पर हमला
करने को जायज़ क़रार नहीं देते। किसी भी विदेशी हमला करने वाले के
सामने सिर झुका देना या विदेशी सेना से पराजित हो जाना किसी
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