भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 122, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ पुस्तक प्रवेश
क्षित छोड़ दिया, कुछ मन्दिरों को लूटा, और कहा जाता है सोमनाथ पर
हमला करके वहाँ की मूर्ति को तोड़ा और लूट का बहुत सा माल लेकर
ग़ज़नी वापस चला गया। सोमनाथ पर महमूद ग़ज़नवी के हमले की
सच्चाई के विषय में भी प्रामाणिक इतिहासज्ञों में ज़बरदस्त मतभेद है।
महमूद के चरित्र के अनेक गुणों की भी अनेक इतिहास लेखक मुक्त-कण्ठ
से प्रशंसा करते हैं।* किन्तु यह सब बहस हमारे प्रसंग से बाहर है।
इसमें सन्देह नहीं कि महमूद की सेना में हज़ारों सिपाही हिन्दू थे, उसका एक
प्रसिद्ध सेनापति हिन्दू था, जिसका नाम तिलक था और जिसने एक बार
महमूद के एक मुसलमान सेनापति के विद्रोह को दमन किया था। जो कुछ
भी हो महमूद के हमलों का कोई स्थायी असर भारत पर न रह सकता था।
महमूद के हमलों का मूल्य ज़्यादा से ज़्यादा एक धन लोलुप आक्रामक के
हमलों से अधिक नहीं कहा जा सकता। इस देश पर उसका प्रभाव भी
क्षणभङ्गुर था।
मोहम्मद गोरी
सौ साल बाद तुरकों ने अफ़गानिस्तान के ग़ोरी राजकुल को दबाना
और खदेड़ना शुरू किया, जिसके फलस्वरूप मोहम्मद ग़ोरी को भारत पर
हमला करने के लिए क़रीब क़रीब विवश होना पड़ा। मोहम्मद ग़ोरी के
समय से पञ्जाब पर भी मुसलमानों का शासन जम गया। मोहम्मद ग़ोरी
के भारत आने के समय तक भारत की राजनैतिक अव्यवस्था हद को पहुँच
गई थी। तेरहवीं सदी तक उत्तर भारत पर मुसलमानों का राज जम गया।
- Medieval Hindu India, by C. V. Vaidya vol iii, p. 104. and
History of Medieval India, by Ishwari Prashad, p. 91