भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३२ पुस्तक प्रवेश
के इस देश में आने से बहुत पहले खिलाफ़त के अरब लोग
यात्रियों के रूप में इन तटों पर पहुँच चुके थे और देशवासियों
के साथ तिजारत का सम्बन्ध और मेल जोल पैदा कर चुके थे ।
अब देश के ठीक इन्हीं हिस्सों में नवीं सदी से लेकर बारहवीं
सदी तक वे ज़बरदस्त धार्मिक तहरीकें शुरू हुईं जो शङ्कर,
रामानुज, आनन्दतीर्थ और वासव के नामों के साथ सम्बन्ध
रखती हैं। ऐतिहासिक सम्प्रदायों में से अधिकांश इन्हीं तहरीकों
से पैदा हुईं और बहुत दिनों तक हिन्दोस्तान में इनसे मिलती
जुलती और कोई चीज़ न थी।"*
थोड़ी सी सरसरी तुलना से मालूम हो सकता है कि उस समय के
क़रीब क़रीब सब हिन्दू आचार्यों ने अपने समय के इसलाम से काफ़ी
विचार लिए ।
अब हम आठवीं सदी से लेकर पन्द्रहवीं सदी तक के मुख्य मुख्य
भारतीय आचार्यों और महात्माओं के उपदेशों की इसलाम और सूफ़ियों
के उपदेशों के साथ थोड़ी सी तुलना करते हैं। हमारा हरगिज़ यह
मतलब नहीं है कि इन महात्माओं ने जिन सिद्धान्तों का प्रतिपादन
किया, वे सब किसी न किसी रूप में या कम से कम बीज रूप में भारत
के उससे पहले के धार्मिक साहित्य में मौजूद न थे, इसमें भी सन्देह
नहीं कि ख़ासकर शङ्कर जैसे विद्वानों ने अधिकतर भारत के प्राचीन ज्ञान
भण्डार से ही अपनी ज्ञान पिपासा को तृप्त किया और उसी
आधार पर अपने शेष देशवासियों को ठीक मार्ग पर लाने का प्रयत्न किया।
- Barth: Religions of India.