भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 115, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंलाखों मनुष्य चारों ओर से आ आकर इन सूफ़ियों की ख़ानक़ाहों में जमा
होते थे और इसमें कोई सन्देह नहीं कि उस ज़माने के मुसलमानों के
जीवन और विचारों पर इनका बहुत गहरा प्रभाव था ।
महात्मा मन्सूर का नाम संसार भर में प्रसिद्ध है । मन्सूर ने
भारत की भी यात्रा की थी । उसका मुख्य सिद्धान्त और वाक्य "अनल
हक़" था, जिसका ठीक वही अर्थ है जो 'अहं ब्रह्म' का है। अपने आज़ाद
ख़यालों के सबब से ही मन्सूर को क़ैद किया गया और सन् ६२२ ईसवी में
यातनाएँ दे देकर सूली पर चढ़ा दिया गया । कबीर, दादू, नानक और
अन्य भारतीय महात्माओं के वचनों में मन्सूर के वाक्य के वाक्य इधर से
उधर तक भरे हुए हैं। मन्सूर सबको खुदा मानता था और हर तरह की दुई
को धोखा बतलाता था । क़ुदरती तौर पर इस अद्वैतवाद ने उस समय के
असंख्य मुसलमानों में सब मज़हबों की एकता और एक दूसरे की ओर
उदारता के विचार भी पैदा किए। सूफ़ियों के साहित्य में योगाभ्यास के
मुक़ामात, समाधि, सत्सङ्ग की महिमा, गुरु के महत्व, प्राणायाम इत्यादि का
खूब ज़िक्र आता है और भक्ति के उन्माद में गाने, बजाने और नाचने की
तारीफ़ की गई है । शेख़ बदरुद्दीन के विषय में, जो तेरहवीं सदी में भारत
में आकर रहने लगा था, लिखा है कि जब वह इतना बूढ़ा हो गया था कि
हिल डुल न सकता था तब भी हरि कीर्तन की आवाज़ पर वह तुरन्त अपने
बिस्तरे से कूद कर जवान मनुष्य की तरह नाचने लगता था । जब उससे
पूछा जाता था कि इस निर्बल अवस्था में शेख़ कैसे नाच सकता है तो वह
जवाब देता था, "शेख़ कहाँ है ? इश्क़ नाच रहा है ।" *
- Blochman and Jarrett : Ayeen-i- Akbari, vol, iii, p. 368.