भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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पर बुद्ध के विचारों की छाप साफ़ दिखाई देती है। अबुल अला आत्मा के
आवागमन में विश्वास करता था, कड़ा निरामिषभोजी था, यहाँ तक
कि दूध और शहद या चमड़े के उपयोग को भी पाप मानता था, प्राणिमात्र
के साथ दया का उपदेश देता था, आहार और वस्त्रों में अत्यन्त परहेज़गार
था और ब्रह्मचर्य को आत्मा की उन्नति के लिए आवश्यक बताता
था, मसजिद, नमाज़, रोज़े और दिखावटी मज़हब का वह बड़ा विरोधी
था।* अपने एक पद में वह लिखता है—
“ला इलाह इल्लल्लाह ! सच है, किन्तु जो मनुष्य कि अँधेरे
में भी उस स्वर्ग को खोजता है, जो स्वर्ग मेरे अन्दर और तुम्हारे
अन्दर मौजूद है, उसकी अपनी आत्मा के सिवा कोई दूसरा रसूल
भी नहीं है।”
अबुलअला संसार को माया मानता था ।
उमरख़य्याम के स्वतन्त्र विचार प्रसिद्ध हैं। रतजगे करना, लम्बे लम्बे
उपवास रखना, और कई तरह के नियम और तप सूफ़ियों ने मोहम्मद
साहब की ज़िन्दगी से सीखे, किन्तु सूफ़ियों के सिद्धान्तों पर ईसाई मत,
प्राचीन ईरान के ज़रथुस्त्री मत और भारतीय हिन्दू और बौद्धमतों इन सब
की छाप भी साफ़ दिखाई देती थी। मोहम्मद साहब ने संसार से पृथक रहने
को मना किया था, किन्तु उनके अनुयाइयों में आरम्भ से ही इस तरह के
लोग पैदा हो गए थे जिनका सिद्धान्त संसार से भागना ( अलफ़िरारो
मिनददुनिया ) था। कट्टर मौलवियों और इन आज़ाद ख़याल सूफ़ियों में
बराबर झगड़ा चला आता था, फिर भी सैकड़ों साल तक हज़ारों और
- Baerlein : Abul-Ala, the Syrian.