भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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"इनमें से एक बहुत बड़ा अधिकांश भाग ऐसे लोगों का है,
जिन्होंने अपनी स्वतन्त्र इच्छा से इसलाम मत स्वीकार किया।"*
एक दूसरा इतिहास लेखक टाउन्सएड लिखता है—
"इस मत के यहाँ पर फैलने का ख़ास सबब ज़बरदस्ती
नहीं है।"†
एक दूसरे स्थान पर यही लेखक भारतीय मुसलमानों के विषय में
लिखता है—
"इन तमाम मुसलमानों में से ६० फ़ीसदी में भारतीय रक्त
है, वे इस देश के वैसे ही बच्चे हैं जैसे हिन्दू। उनमें बहुत से
पुराने हिन्दू अन्धविश्वास भी अभी तक मौजूद हैं। वे केवल इस
लिए मुसलमान हैं, क्योंकि उनके पूर्वजों ने अरब के उस महा-
पुरुष का मत स्वीकार किया था।"‡
और आगे चल कर यही विद्वान लिखता है कि भारत में मुसलमानों
का राज क़ायम हो जाने के बाद भी प्रजा को ज़बरदस्ती मुसलमान करना
अधिकांश नए मुसलमान शासकों के स्वार्थ और उनकी रुचि दोनों के
विरुद्ध था। वह लिखता है—
- "By far the majority of them entered the pale of Islam of their own
free will."—The Preaching of Islam, by T. W. Arnold, 1913, p 255.
† "Its spread as a faith is not due mainly to compulsion."—Asia and
Europe, London, 1911. by M. Townsend, p. 44.
‡ "Ninety per cent of the whole body of the Muslims are Indians by
blood, as much children of the soil as the Hindoos, retaining many of the
old pagan superstitions, and only Mussalmans because their ancestors em-
braced the faith of the Great Arabian."—Ibid, p. 43.