भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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भारत के ऊपर मुसलमानों का राजनैतिक प्रभुत्व या तो शुरू ही न हुआ
था और या कम से कम अभी जमने न पाया था ।
भारत में इसलाम का प्रचार
हमारा हरगिज़ यह मतलब नहीं कि मुसलमानों की राजसत्ता का इस
देश के अन्दर इसलाम के फैलने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा । निस्सन्देह हर
युग और हर देश में प्रजा के ऊपर राजा या शासकों के धार्मिक विचारों
का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक और अनिवार्य है । यदि सम्राट अशोक न होता
तो बौद्ध धर्म का भारत के एककोने से दूसरे कोने तक इस तरह फैल सकना
शायद इतना आसान न होता । इसी तरह यदि सम्राट समुद्रगुप्त और
चन्द्रगुप्त (दूसरा) वैष्णव मत के पोषक और सम्राट यशोधर्म देव ( विक्रमा-
दित्य ) शैव मत के पोषक न होते तो हिन्दू मत का बौद्ध मत को भारत से
निकाल बाहर कर सकना इतना सरल न होता । हम यह भी नहीं कहते
कि भारतवासियों से इसलाम मत के स्वीकार कराने में कहीं पर किसी
तरह की भी ज़बरदस्ती का उपयोग नहीं किया गया । दुर्भाग्यवश धार्मिक
मामलों में थोड़ी बहुत ज़बरदस्ती संसार के हर देश के इतिहास में पाई
जाती है । हिन्दू मतों के साथ बौद्ध मत और जैन मत के सङ्घर्ष के दिनों
में भी इस तरह की ज़बरदस्तियों की अनेक मिसालें भरी पड़ी हैं । किन्तु
इतिहास से बिलकुल साफ़ पता चलता है कि इस देश के अन्दर मुसल-
मानों के हमलों से बहुत पहले इसलाम मत प्रवेश कर चुका था, इसलाम
इस देश में महमूद ग़ज़नवी के हमले से भी पहले काफ़ी उन्नति कर चुका
था, और इसलाम के भारत में फैलने का ख़ास सबब उस समय के इसलाम
के प्रचारकों का त्याग, उनकी सच्चरित्रता, और इसलाम मत के वे स्पष्ट और