भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस्लाम और भारत ७३
फ़क़ीरों और प्रचारकों का बड़े प्रेम के साथ स्वागत किया और
उन्हें अपनी अपनी रियासत में इसलाम प्रचार के लिए हर तरह की
सहायता दी।
ग्यारहवीं सदी के क़रीब खम्भात में कुछ हिन्दुओं ने मुसलमानों की
एक मसजिद पर हमला करके उसे गिरा दिया। राजा सिद्धराज ने तहक़ी-
क़ात करके अपराधियों को दण्ड दिया और मुसलमानों को अपने धन से
एक नई मसजिद बनवा दी। सोमनाथ के हिन्दू राजा के अधीन मुसलमान
सेना और अनेक मुसलमान अफ़सर थे। ग्यारहवीं सदी में गुजराती बोहरों
के शिया धर्माचार्य ने यमन ( अरब) से आकर गुजरात में रहना शुरू
किया। उसी समय के निकट नूरुद्दीन ने गुजरात के कुनबियों, खेरवाओं और
काडियों को इसलाम धर्म में शामिल किया। उन असंख्य मुसलमान सन्तों
और फ़क़ीरों के नाम गिनाने की आवश्यकता नहीं है, जो आठवीं सदी से
लेकर पन्द्रहवीं सदी तक बराबर उत्तर से लेकर दखिन तक और पूरब से
लेकर पच्छिम तक भारत के विविध भागों में आकर बसते रहे और जिनके
उच्च चरित्र और इसलाम के सरल धार्मिक सिद्धान्तों के सबब उस धार्मिक
अव्यवस्था के युग में स्थान स्थान पर हज़ारों और लाखों भारतवासियों ने
इसलाम धर्म स्वीकार करना शुरू कर दिया। अभी तक यदि उत्तर भारत के
उन ग्रामों में घूमा जाय, जिनकी अधिकांश आबादी मुसलमान है, तो
दरयाफ़्त करने पर मालूम होगा कि वहाँ के लोगों के इसलाम मत स्वीकार
करने का सबब किसी न किसी समय किसी न किसी त्यागी और संयमी
मुसलमान फ़क़ीर का उनके अन्दर सहवास ही था। हमें फिर यह याद रखना
चाहिए कि यह कहानी अधिकतर उस ज़माने की है, जब कि अधिकांश