भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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भारत के पूर्वी तट पर भी मुसलमानों की बस्तियाँ और उनका
महत्व बढ़ता चला गया । इन बस्तियों के अलग अलग नाम, हवाले और
मुसलमानों की बढ़ती हुई तादाद को बयान करने की आवश्यकता नहीं
है । एक मुसलमान फ़क़ीर नज़द वली (Nathad Vali) के प्रभाव से
ग्यारहवीं सदी में मदुरा और त्रिचन्नपल्ली के इलाक़ों में अनेक लोगों ने
इसलाम मत स्वीकार किया । यह नज़द वली टर्की का एक शहज़ादा था,
जो फ़क़ीर हो गया था, और अरब, ईरान और उत्तर भारत से होता हुआ
त्रिचन्नपल्ली पहुँचा था, जिसे उस समय त्रिसूर कहते थे । बारहवीं सदी में
एक दूसरे फ़क़ीर सय्यद इब्राहीम शहीद के प्रभाव से अनेक लोगों ने इसलाम
मत स्वीकार किया । इसी तरह बाबा फ़ख़रुद्दीन इत्यादि अनेक अन्य इस-
लाम धर्म प्रचारकों के नाम उस समय के इतिहास में मिलते हैं । बाबा
फ़ख़रुद्दीन के प्रभाव से पेन्नुकोण्डा के हिन्दू राजा ने इसलाम मत स्वीकार
किया । यह भी साफ़ पता चलता है कि इन अरबों और मुसलमानों की
कोशिश से भारत और ख़ास कर दक्खिन भारत की तिजारत और खुशहाली
में बहुत बड़ी तरक्क़ी हुई । दक्खिन के हिन्दू राजाओं की ओर से चीन जैसे
दूर दूर के देशों में मुसलमान एलची और राजदूत भेजे जाते थे । अनेक
हिन्दू दरबारों में मुसलमान मन्त्री और प्रधान मन्त्री थे । अनेक प्रान्तों के
शासक मुसलमान नियुक्त किए जाते थे । हिन्दू राजाओं के अधीन बड़ी बड़ी
मुसलमान सेनाएँ थीं ।
इसी तरह गुजरात के वल्लभी राजा वलहार ने अपने राज के अन्दर
मुसलमानों का बड़े हर्ष और आदर के साथ स्वागत किया । काठियावाड़,
कोकण और मध्यभारत के अन्य हिन्दू राजाओं ने भी मुसलमान